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आज विश्व के अंतरिक्ष पोर्टों में श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार का एक सर्वोत्तम नाम है। भारत के अंतरिक्ष यान यही से उडान भरते हैं और स्वदेशी तथा वाणिज्य उपग्रहों को अपने निश्चित अंतरिक्ष गंतव्य तक ले जाते हैं। सुदूर संवेदन, संचार और वैज्ञानिक उपग्रहों जैसे विभिन्न प्रकार के अंतरिक्ष अभियानो को यहीं से सम्पादित किया जाता है । इस अंतरिक्ष केंद्र के नाम को जो शार !श्रीहरिकोटा रेंज! के नाम से जाना जाता है, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के भूतपूर्व अध्यक्ष प्रो. सतीश धवन की स्मृति में बदलकर, 05 सितंबर 2002 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र शार रखा गया ।
भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम अपने आरंभिक चरण में डॉण् विक्रम साराभाई की अध्यक्षता में 'रोहिणी'श्रृखंला के परिज्ञापी रॉकेटों को निर्माण करने के साथ—साथ स्वदेशी उपग्रहों तथा उन्हें ले जाने के लिए प्रमोचन यानों को तैयार करने के लिए आरंभ किया गया । तदनुसार यह निर्णय किया गया कि घनी आबादी से दूर भारत के पूर्व समुद्री तट पर रॉकेट प्रमोचन केंद्र की स्थापना की जाए, जो विभिन्न अभियानों के लिए लाभदायक हो । रेंज की सुरक्षा की दृष्टि से इसके आस—पास आबादी कम होनी चाहिए । इन अपेक्षताओं के मददेनजर आंध्र प्रदेश के श्री पेटिश्रीरामुल्लु नेल्लूरू जिले में स्थित पुलिकाट झील के अप्रवाही जल, पश्चिम में बंकिघम नहर और पूर्व में बंगाल की खाडी से घिरे तर्करूपी द्वीप श्रीहरिकोटा को उपयुक्त माना गया । इस प्रकार श्रीहरिकोटा द्वीप को सन 1969 में रॉकेट प्रमोचन केंद्र को स्थापित करने के लिए चुना गया ।

चैन्नई कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग !एनएच—5! पर स्थित एक छोटे उपनगर सुल्लुरूपेट से हटकर, पूर्व की ओर गाडी से 20 मिनिट में पुलिकाट झील को पार कर श्रीहरिकोटा को पहुंचा जा सकता हैं।
श्रीहरिकोटा का क्षेत्रफल 43,360 एकड अर्थात 175 वर्ग कि.मी. हैं । इसका समुद्रीतट 50 कि.मी. है। यह द्वीप मुख्यत: यूकेल्पिटस, कैसुरिना एवं झाडीदार जंगल से भरा हैं। इस द्वीप पर दक्षिण—पश्चिम और उत्तर—पूर्व मानसूनों का प्रभाव रहता हैं। वर्ष के अधिकतम दिनों में यहॉं पर खुला और साफ वातावरण बना रहता है, जो कि बाहय स्थैतिक जॉंच और रॉकेट के प्रमोचन के लिए उपयुक्त माना जाता है। अक्टूबर—दिसंबर के दौरान यहॉं पर दूर—दराज स्थानों से हजारों की तादाद में प्रवासी पक्षियों का झुंड आने लगता है, जो प्राकृतिक प्रेमियों और पक्षिविज्ञानियों के लिए श्रीहरिकोटा को वास्तविक स्वर्ग के रूप में बदल देता है।